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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए 2017

  • 14 Feb

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए 2017

     

    बारह साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद भारत के प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी

    प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के स्वामी हैं. मिडिया के एक वर्ग द्वारा लगातार विवादस्पद परिस्थितियां

    पैदा किये जाने के बावजूद इनकी लोकप्रियता बढती रही. मोदी का जन्म 17 सितम्बर सन् 1950

    को सुबह 11 बजे बडनगर, गुजरात में हुआ था। इनका लग्न और इनकी राशि वृश्चिक है

    जिसका स्वामी मंगल काफी मजबूत अवस्था में स्वग्रही है. एक सर्वेक्षण के आधार पर 35 वर्ष

    तक की उम्र के युवाओं में ये खासे लोकप्रिय हैं. आधुनिक तकनीकी का ये बेमिसाल प्रयोग करते

    हैं. फेसबुक, ट्वीटर, गूगल प्लस, गूगल हैंगआउट, वाईबर, विडिओ कोंफेरेंसिंग आदि के माध्यमों

    का बेजोड़ इस्तेमाल करते हैं ये. कंप्यूटर, इंटरनेट आदि का प्रयोग ये काफी पहले से करते हैं.

    इनका बुध वक्री होकर अपनी उच्च अवस्था में लाभ भाव में विराजमान है, जो इन्हें आधुनिक

    तकनीकी में सहज बनाता है और दक्षता दिलाता है. मंगल और चन्द्र के प्रथम भाव में

    उपस्थिति से पञ्च महापुरुष राजयोग बनता है जिसे रुचक योग कहते हैं. इसी का प्रभाव हैकि

    एक चाय बेचने वाले ने प्रधानमंत्री बनने का सपना देखा और सारे देश में लहर पैदा करने में

    सफल हो गया. हालाँकि अभी इनकी चन्द्रमा की दशा चल रही है, जो नीच का होकर लग्न में

    बैठा है, लेकिन मंगल की उपस्थिति ने नीचभंग राजयोग बना दिया, जिसने इन्हें हर परिस्थिति

    से लड़ने में सक्षम बना दिया. अभी चन्द्रमा की दशा में गुरु की अन्तर्दशा चल रही है जो 6-3-

    2016 तक चलेगी और उसके बाद शनि की अन्तर्दशा प्रारंभ हो जाएगी. ये भी उल्लेखनीय है कि

    मोदी जी अभी शनि की साढ़े-साती से गुजर रहे हैं जो अपने पूरे प्रभाव में है, जिसे हमलोग

    बोलचाल में छाती पर साढ़े-साती होना कहते हैं. शनि को प्रसन्न करने के लिए लोहे का दान

    किया जाता है। शायद इसी के मद्देनजर मोदी ने सरदार पटेल की लौह प्रतिमा बनवाने के लिए

    पूरे देश से लोहा दान में मांगा। इससे शनि और प्रसन्न हुए। अपने कठोर श्रम से भारत को

    विकसित राष्ट्र बनाने को कृतसंकल्प रहने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को

    आर्थिक रूप से समृद्ध एवं शक्तिशाली बनाने के लिए भी प्रयासरत हैं।

    यदि अभी सरसरी तौर पर देखा जाय तो नरेंद्र मोदी के सितारे इन दिनों कुछ अच्छे नहीं चल रहे

    हैं। पहले दिल्ली विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल और अब बिहार विधानसभा चुनावों में

    लालू-नीतीश के हाथों हुई हार से उनके राजनीतिक विरोधी मुखर होकर उनकी आलोचना कर रहे

    हैं। बहुत संभव है इस वर्ष भी कोई बड़ा चुनाव जीतने में इन्हें कठिनाई हो. अभी गोचर का शनि

    वृश्चिक में चन्द्रमा पर ही है, जिससे पार्टी की अंदरूनी राजनीती में बड़ा फेरबदल हो सकता है.

    पार्टी के अन्दर मोदी से विक्षुब्ध गुट थोडा शक्तिशाली दीख सकता है. राहू-केतु का अक्ष भी

    उल्टा हुआ है यानि जन्मकुंडली के राहू पर गोचर का केतु है और जन्मकुंडली के केतु पर गोचर

    का राहू है, जो तात्कालिक रूप से हर प्रकार की समस्याओं को बढ़ा सकता है. विरोधियों पर

    नियंत्रण कमजोर हो सकता है. अपने ही साथियों की कार्य शैली से इनकी किरकिरी हो सकती है.

    सबसे बड़ी बात इनकी पार्टी के अंदरूनी साथी ही इनके दुश्मन बनेंगे और उन्हें डुबोने का काम

    कर रहे हैं। यदि भविष्य में मोदी पर किसी तरह का कोई संकट आता भी है तो इन ग्रह-नक्षत्रों

    के कारण उसके जिम्मेदार उनकी अपनी पार्टी के लोग होंगे जो गुप्त रूप से उनके खिलाफ

    अभियान चला रहे होंगे। विश्वस्त मित्र अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरेंगे. इसके साथ ही मोदी के

    पुराने अच्छे साथी भी उनका साथ छोड़ देंगे। हाल ही में अरुण शौरी, राम जेठमलानी आदि इसके

    उदहारण हैं. अपने चहेतों को बचाने के चक्कर में भी इनकी हंसी उड़ सकती है. इस वर्ष इन्हें

    दुर्घटनाओं से सावधान रहते हुए स्वास्थ्य की अवहेलना से भी बचना चाहिए.

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